Wednesday, October 9, 2013

लाजे हम भागि गेलौ :- सत्यनारायण झा

१९६६सं १९७२ तक हमरा गाम मे दुर्गा पूजा मे नाटक बहुत जोर सोर सं होयत छलैक |प्रचार पसार सेहो खुब होयत छलैक |दुर्गा स्थानक फिल्ड लोक सं पाटि जाइत छलैक |ओहि समय के टीम एतेक ससक्त रहैक जे नव तुरिया लग बुढा सभ के नहि चलनि |पूजा कमिटी अलग आ नाटक कमेटी अलग |दुनुक फंड सेहो अलग अलग |रांटी ,मंगरौनी पिलखवार मिथिलाक सर्वश्रेष्ठ गाम ,पुरा गाम संस्कृत विद्वान सं भरल आ तेहने रूढ़ीबादी सभ |नाटक के बिरोध ,जे नाटक मे भाग लेत ओकरा हाथक कियो पानि नहि पितै |मुदा नवतुरियो सभ एक जुट, नहि पानि पिताह त’ हम सभ अपना मे पियब आ एना संघर्ष कय हमरा लोकनि नाटक खेलेलौ आ बुढा सभ सेहो देखय लगलाह आ भरि भरि राति देखैत छलाह |नव तुरिया स्वतंत्र भ’ गेल आ हमरा सभक नाटकक प्रचार बहुत भ’ गेलैक |ओहि समय दुर्गास्थान गनले गुथल गाम मे रहैक तै भीड़ स्वभाविक |१९६७ के बात छैक चारिटा नाटकक चुनाव भेल ताहि मे एकटा मेघनाद बद्ध सेहो रहैक |एक दुटा धार्मिक ,बांकी सामाजिक मुदा कम सं कम दुटा मैथिली नाटक चुनाव होयक |मैथिली नाटकक पुस्तक के अभाव रहैक तैयो जेना तेना मैथिली नाटक जरुर होयक |हाँ ,त’ १९६७ मे
मेघनाद वद्ध नाटक के विषय मे कहैत छलौ ,एहि टीम मे जीवानंद मिश्र ‘जीवन’रावण
,हम राम आ भगवान मेघनाद बनल रहथि |एहिना विभिन्न पार्ट मे विश्वनाथ मिश्र उर्फ शंकरजी ,विजयनाथ झा ,भवनाथ मिश्र ,मुक्ति नारायण ,मोहन झा आदि सभ रहथि |मास्टर नर्सिंग नारायण मिश्र ,विद्यार्थी बहुत मेहनत करैत छलाह ओ पार्टो
लैत छलाह आ कास्टिंग सेहो तैयार करैत छलाह |नाटक नियत समय पर प्रारम्भ भेल |पुरा फिल्ड लोक सं भरल |४५ वर्ष पहिनेक किस्सा छैक |टेक्निक त’ ओतेक डेवलप नहि रहैक आने लोके ओतेक बुझैक ,जैह देखै से अजूबा लगैक |रावणक आवाज माइक पर लगैक जेना साक्षात रावण छैक |लक्ष्मण आ मेघनाद के युद्ध भ’ रहल छलैक आ मेघनाद शक्ति वाण के प्रयोग क’ देलकै आ लक्ष्मण मूर्छित भ’ जाय छैक |ओकर बाद रामक बिलापक सीन रहैक |जीवानंद जी रावण बनल रहथि ओ एकटा चादरि देह पर लय माइक पर गेलाह आ जनता के संबोधन केलनि जे सभ लोक शांत भ’ बैसू कारण एखुनका दृश्य राम विलाप अत्यंत मार्मिक आ सुन्दर अछि ,नाटकक अहम् भाग अछि ,पुरा श्रोता शांत ,यद्यपि जीबन जीक उद्घोषणा हमरा ठीक नहि लागल कारण ओ स्वं रावण छलाह ,हमरा समय नहि छल |स्टेज पर गेलौ |पार्ट ततेक नीक भेलैक जे बहुत लोक क’ नोर खसय लगलनि |पुरा श्रोता ग़मगीन भ’ गेलाह |आब असली बात पर अबैत छी |अंतिम सीन मे राम रावण क’ युद्ध होयत रहैक |अंत मे राम याने हम एकटा तीर रावण पर चला देलियैक |रावण के पेट मे लगलैक ,रावण राम के दुर्वचन कहैत पेट पकरि कहरति चारुकात घुमैत छैक आ रावण के पेट सं शोनितक धार फुटैत छैक आ ओ खासि परैत छैक |शोनितक बेलून ततेक नीक सं सेट रहैक जे लोक के भेलैक जे सही मे तीर लागि गेलैक आ सही शोणित खसैत छनि |दर्शक मे हल्ला उठि गेलैक |बहुत जोर हल्ला उठलैक |उद्घोषक कमलनाथ जी कतबो शांत करथीन मुदा लोक शान्ते नहि होयक |आगा के पार्ट रुकल रहैक |अंत मे रावण स्वं उठि लोक के शांत केलनि |रावण के उठैत हम लाजे पर्दा के पाछू भागि गेलौ आ लोक शांत भेलैक कि रावण फेर मूर्छित भ’ खसि परला |हमरा हिम्मत नहि भेल जे स्टेज पर जायब |हम पाछू सं माइक सं एनाउंस क’ देलियैक जे नाटक समाप्त भ’ गेल आ श्री रोहणी रमण झा सं प्रहसनक आनन्द लिअ |पर्दा खासा देलियैक |


 सत्यनारायण झा के फेसबुक वाल सँ साभार 

1 comment:

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